
वास्तु शास्त्र
वास्तु, निवास का वैदिक विज्ञान
घर या कार्यस्थल को दिशाओं और पंचतत्वों के अनुरूप बनाना, ताकि उसमें ऊर्जा का प्रवाह सही रहे।
हर दिशा का एक अधिपति देवता और एक तत्व होता है: उत्तर-पूर्व (ईशान) जल और पूजा का स्थान है, दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) अग्नि और रसोई का, और उत्तर (कुबेर) धन का। परंपरा में असंतुलन को तोड़फोड़ से नहीं, उपाय से ठीक किया जाता है: ऊर्जा को केंद्रित करने के लिए पिरामिड, दिशा के देवता के लिए यंत्र, और सही स्थान पर रखी गई मूर्ति।
नीचे दिए गए पारंपरिक उपाय स्टोर में उपलब्ध हैं। आपके घर के नक्शे का पूरा वास्तु परामर्श हमारी ज्योतिषी सेवा के साथ जल्द आ रहा है।
दिशाएँ और उनके तत्व
उत्तर-पूर्व (ईशान)
जल और पूजा: पूजा घर के लिए सही स्थान।
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय)
अग्नि: रसोई यहीं होनी चाहिए।
उत्तर (कुबेर)
धन: इसे खुला और साफ़-सुथरा रखें।
दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य)
पृथ्वी और स्थिरता: मास्टर बेडरूम।
वास्तु उपाय
क्रिस्टल वास्तु पिरामिड
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