आज का पंचांग
आज का पंचांग
तिथि, नक्षत्र, योग और करण उनके समाप्ति समय के साथ, सूर्योदय और चंद्रोदय, राहु काल और दिन के मुहूर्त, दुनिया के किसी भी शहर के लिए।
शनिवार, 31 अक्टूबर 2026
कृष्ण षष्ठी, आर्द्रा
कार्तिक मास (पूर्णिमांत), आश्विन (अमांत) · शरद · New Delhi
सूर्योदय
6:32 am
सूर्यास्त
5:36 pm
चंद्रोदय
10:27 pm
चंद्रास्त
11:58 am
पंचांग: पाँच अंग
तिथि
कृष्ण षष्ठी
4:57 pm तक
नक्षत्र
आर्द्रा
स्वामी: राहु
7:11 am तक
योग
सिद्ध
5:30 pm तक
करण
वणिज
4:57 pm तक
वार
शनिवार
शुभ और अशुभ समय
अभिजीत मुहूर्त शुभ
11:42 am – 12:26 pm
दिन का सबसे अच्छा समय
राहु काल टालें
9:18 am – 10:41 am
नया काम शुरू करने से बचें
गुलिक काल टालें
6:32 am – 7:55 am
शुभ कार्यों की शुरुआत से बचें
यमगंड टालें
1:27 pm – 2:50 pm
यात्रा और नए काम से बचें
मास, ऋतु और राशियाँ
- मास (पूर्णिमांत)
- कार्तिक
- मास (अमांत)
- आश्विन
- पक्ष
- कृष्ण
- ऋतु
- शरद
- चंद्र राशि
- मिथुन
- सूर्य राशि
- तुला
- अयनांश (लाहिड़ी)
- 24.2319°
- स्थान
- 28.61°, 77.21° (Asia/Kolkata)
चुने गए स्थान के लिए सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से एक मुफ़्त खगोलीय इंजन द्वारा गणना। छपे हुए पंचांगों से समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
पंचांग के बारे में
पंचांग क्या है?
पंचांग किसी दिन और स्थान का हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग होते हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा का तारा), योग और करण। इन्हीं से तय होता है कि पूजा, यात्रा या किसी नई शुरुआत के लिए कौन सा समय उचित है।
शहर बदलने पर पंचांग क्यों बदलता है?
सूर्योदय, सूर्यास्त और राहु काल जैसे काल स्थानीय सूर्य पर आधारित होते हैं, इसलिए ये देशांतर और अक्षांश के साथ बदलते हैं। तिथि और नक्षत्र हर जगह एक ही क्षण में बदलते हैं, पर उस क्षण का स्थानीय समय अलग होता है।
राहु काल क्या है?
राहु काल दिन के प्रकाश का आठवाँ भाग है, और कौन सा आठवाँ भाग होगा यह वार पर निर्भर करता है। परंपरा से इसमें नया काम, खरीदारी या यात्रा शुरू नहीं की जाती। गुलिक और यमगंड भी इसी तरह निकाले जाते हैं।
अभिजीत मुहूर्त क्या है?
अभिजीत दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, जिसका मध्य स्थानीय दोपहर पर होता है। जब कोई और मुहूर्त न मिले, तो महत्वपूर्ण काम शुरू करने के लिए इसका व्यापक उपयोग होता है, हालाँकि बुधवार को परंपरा से इसे टाला जाता है।
पूर्णिमांत या अमांत मास?
उत्तर भारत में चंद्र मास प्रायः पूर्णिमा पर समाप्त होता है (पूर्णिमांत), जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत में अमावस्या पर (अमांत)। कृष्ण पक्ष में दोनों के मास के नाम में एक महीने का अंतर होता है, इसलिए हम दोनों दिखाते हैं।
